Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
1 Dec 2022 · 1 min read

बहुजन पत्रकार

ऐसे संगीन दौर में जब कि सारे मीडिया संस्थान बिक चुके हैं, सारे विपक्षी दल रीढ़विहीन हो गए हैं, सारी अदालतें पंगु हो गईं हैं, सारे सुरक्षा विभाग नख-दंतहीन हो गए हैं और सारे बुद्धिजीवी सुविधा भोगी कायर हो गए हैं, देश में लोकतंत्र को बचाए रखने की पूरी ज़िम्मेदारी सोशल मीडिया के बहुजन पत्रकारों के कांधे पर आ पड़ी है।
सच बोल! हल्ला बोल!!
Shekhar Chandra Mitra
#BycottNDTV
#अभिव्यक्ति_की_स्वतंत्रता
#democracy #RavishKumar
#लोकतंत्र #media
#freedomofspeech
#रवीशकुमार #सच्चाई

Language: Hindi
148 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
"चढ़ती उमर"
Dr. Kishan tandon kranti
Expectation is the
Expectation is the
Shyam Sundar Subramanian
जीवन गति
जीवन गति
विनोद कृष्ण सक्सेना, पटवारी
रमेशराज के विरोधरस के दोहे
रमेशराज के विरोधरस के दोहे
कवि रमेशराज
ग़ज़ल
ग़ज़ल
Mahendra Narayan
पता पुष्प का दे रहे,
पता पुष्प का दे रहे,
sushil sarna
2358.पूर्णिका
2358.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
प्यार मेरा तू ही तो है।
प्यार मेरा तू ही तो है।
Buddha Prakash
चाँद सा मुखड़ा दिखाया कीजिए
चाँद सा मुखड़ा दिखाया कीजिए
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
नदी
नदी
Kumar Kalhans
🌹जिन्दगी के पहलू 🌹
🌹जिन्दगी के पहलू 🌹
Dr Shweta sood
एक दिन का बचपन
एक दिन का बचपन
Kanchan Khanna
वो आए और देखकर मुस्कुराने लगे
वो आए और देखकर मुस्कुराने लगे
Surinder blackpen
समझ आती नहीं है
समझ आती नहीं है
हिमांशु Kulshrestha
मृत्यु शैय्या
मृत्यु शैय्या
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
Pardushan
Pardushan
ASHISH KUMAR SINGH
कार्यक्रम का लेट होना ( हास्य-व्यंग्य)
कार्यक्रम का लेट होना ( हास्य-व्यंग्य)
Ravi Prakash
हवा में हाथ
हवा में हाथ
रोहताश वर्मा 'मुसाफिर'
बीमार घर/ (नवगीत)
बीमार घर/ (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
अक्सर लोग सोचते हैं,
अक्सर लोग सोचते हैं,
करन ''केसरा''
शेर
शेर
SHAMA PARVEEN
आंख मेरी ही
आंख मेरी ही
Dr fauzia Naseem shad
💐अज्ञात के प्रति-138💐
💐अज्ञात के प्रति-138💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
फागुन आया झूमकर, लगा सताने काम।
फागुन आया झूमकर, लगा सताने काम।
महेश चन्द्र त्रिपाठी
अपना यह गणतन्त्र दिवस, ऐसे हम मनायें
अपना यह गणतन्त्र दिवस, ऐसे हम मनायें
gurudeenverma198
*अज्ञानी की कलम*
*अज्ञानी की कलम*
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
हमें आशिकी है।
हमें आशिकी है।
Taj Mohammad
कह पाना मुश्किल बहुत, बातें कही हमें।
कह पाना मुश्किल बहुत, बातें कही हमें।
surenderpal vaidya
नकारात्मकता फैलानी हो तो
नकारात्मकता फैलानी हो तो
*Author प्रणय प्रभात*
अंतरिक्ष में आनन्द है
अंतरिक्ष में आनन्द है
Satish Srijan
Loading...