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14 Jul 2023 · 1 min read

फितरत

दर्द मेरा मुझे ही छलने लगा
पलक बंद होते ही
मोतियों सा झरने लगा
होठों पर मुस्कान बरक़रार रही
भीतर भीतर अकेला रहने लगा
बहुत समझाया किसी ने
दर्द बांटना बेकार है,
सौदा ही करना है
तो आंसू बेच कर
मुस्कान सजा ले
पर कहां समझा नादान मन
उसकी फितरत में दिखावा था
दर्द बसा लिया दिल में
बाहर –बाहर हंसने लगा।

6 Likes · 2 Comments · 257 Views
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