Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
13 Jun 2023 · 1 min read

नीलेश

दुनिया में फरेबी और झूठे भी हैं
पर राह में खड़े तुम – से, सच्चे भी तो हैं।
धड़कता है सभी के सीने में – दिल
पर सीने में तुम्हारे तो, चमकता भी है।
आदतों में शुमार सभी की, निंदा और ईर्ष्या है
तुम्हारे अस्तित्व में दुलार, प्रेम और प्रशंसा ही है।

सोचती हूं, मिल जाते तुम बचपन में कहीं
खेल खेल में, बढ़ जाते तुम संग राहों में यहीं।
मिले हो अपने पचपन में, तो क्या
मित्र, तुम सा कोई मिला भी तो नहीं हैं।

जीवन में तुम्हारे सादगी परिपूर्ण है
तुम्हारे रक्त में बहती ‘सरिता’ प्रेम की है।
मन में तुम्हारे दुर्लभ करुणा अपूर्व है
आगे बढ़ने की ओर निरंतर आकांक्षा भी है।

सच कह गए विलियम, एक ज़माने में,
बुतो और सुनहरी इमारतों से उत्तम
रिश्ता उत्कृष्ठ मित्रों का है।
सौभाग्यशाली समझती हूं खुद को,
संबंध मित्रता का निभाया तुमने।
‘नीलेश’ से प्रार्थना है अब मेरी,
मित्रता उन्नती की ओर अग्रसर रहे हमारी।।

205 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Dhriti Mishra
View all
You may also like:
मासूमियत
मासूमियत
Surinder blackpen
नाकाम मुहब्बत
नाकाम मुहब्बत
Shekhar Chandra Mitra
झर-झर बरसे नयन हमारे ज्यूँ झर-झर बदरा बरसे रे
झर-झर बरसे नयन हमारे ज्यूँ झर-झर बदरा बरसे रे
हरवंश हृदय
कृषि पर्व वैशाखी....
कृषि पर्व वैशाखी....
डॉ.सीमा अग्रवाल
मौन जीव के ज्ञान को, देता  अर्थ विशाल ।
मौन जीव के ज्ञान को, देता अर्थ विशाल ।
sushil sarna
आदमी खरीदने लगा है आदमी को ऐसे कि-
आदमी खरीदने लगा है आदमी को ऐसे कि-
Mahendra Narayan
आओ जाओ मेरी बाहों में,कुछ लम्हों के लिए
आओ जाओ मेरी बाहों में,कुछ लम्हों के लिए
Ram Krishan Rastogi
माँ वीणा वरदायिनी, बनकर चंचल भोर ।
माँ वीणा वरदायिनी, बनकर चंचल भोर ।
जगदीश शर्मा सहज
ध्यान
ध्यान
Monika Verma
Beginning of the end
Beginning of the end
Bidyadhar Mantry
मुझे आशीष दो, माँ
मुझे आशीष दो, माँ
Ghanshyam Poddar
वैसे किसी भगवान का दिया हुआ सब कुछ है
वैसे किसी भगवान का दिया हुआ सब कुछ है
शेखर सिंह
हम तो कवि है
हम तो कवि है
नन्दलाल सुथार "राही"
मैं मधुर भाषा हिन्दी
मैं मधुर भाषा हिन्दी
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
रक्त के परिसंचरण में ॐ ॐ ओंकार होना चाहिए।
रक्त के परिसंचरण में ॐ ॐ ओंकार होना चाहिए।
Rj Anand Prajapati
देशभक्ति एवं राष्ट्रवाद
देशभक्ति एवं राष्ट्रवाद
Shyam Sundar Subramanian
विश्वकप-2023 टॉप स्टोरी
विश्वकप-2023 टॉप स्टोरी
World Cup-2023 Top story (विश्वकप-2023, भारत)
3257.*पूर्णिका*
3257.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
इ इमली से
इ इमली से
Dr. Kishan tandon kranti
.... कुछ....
.... कुछ....
Naushaba Suriya
कोई भी मोटिवेशनल गुरू
कोई भी मोटिवेशनल गुरू
ruby kumari
■ कामयाबी का नुस्खा...
■ कामयाबी का नुस्खा...
*Author प्रणय प्रभात*
कैसा दौर आ गया है ज़ालिम इस सरकार में।
कैसा दौर आ गया है ज़ालिम इस सरकार में।
Dr. ADITYA BHARTI
संवेदना...2
संवेदना...2
Neeraj Agarwal
सृजन के जन्मदिन पर
सृजन के जन्मदिन पर
Satish Srijan
दिल के सभी
दिल के सभी
Dr fauzia Naseem shad
यह सब कुछ
यह सब कुछ
gurudeenverma198
*आज छपा जो समाचार वह, कल बासी हो जाता है (हिंदी गजल)*
*आज छपा जो समाचार वह, कल बासी हो जाता है (हिंदी गजल)*
Ravi Prakash
स्नेह की मृदु भावनाओं को जगाकर।
स्नेह की मृदु भावनाओं को जगाकर।
surenderpal vaidya
नए मुहावरे में बुरी औरत / MUSAFIR BAITHA
नए मुहावरे में बुरी औरत / MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
Loading...