Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
17 Apr 2024 · 1 min read

Dr Arun Kumar shastri

Dr Arun Kumar shastri

जो समझते हैं बस उन्ही के लिए बाकी लोग इस quote से दूर ही रहें तो अच्छा होगा।

“वक्त से भी ज्यादा महंगी भावनाएं होती है,
जो समझ सकता हो उसी पर खर्च करनी चाहिए।

होशियार #

बाकी तो 1 रुपया किलो बिक रहे भाई जी ।

36 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from DR ARUN KUMAR SHASTRI
View all
You may also like:
जय प्रकाश
जय प्रकाश
Jay Dewangan
जां से बढ़कर है आन भारत की
जां से बढ़कर है आन भारत की
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
कविता के अ-भाव से उपजी एक कविता / MUSAFIR BAITHA
कविता के अ-भाव से उपजी एक कविता / MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
*मुख्य अतिथि (हास्य व्यंग्य)*
*मुख्य अतिथि (हास्य व्यंग्य)*
Ravi Prakash
यही समय है!
यही समय है!
Saransh Singh 'Priyam'
डॉ अरुण कुमार शास्त्री
डॉ अरुण कुमार शास्त्री
DR ARUN KUMAR SHASTRI
23/53.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/53.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
Indulge, Live and Love
Indulge, Live and Love
Dhriti Mishra
इंसान इंसानियत को निगल गया है
इंसान इंसानियत को निगल गया है
Bhupendra Rawat
पिता के प्रति श्रद्धा- सुमन
पिता के प्रति श्रद्धा- सुमन
Mrs PUSHPA SHARMA {पुष्पा शर्मा अपराजिता}
ज़िन्दगी
ज़िन्दगी
डॉक्टर रागिनी
कैसे कहूँ किसको कहूँ
कैसे कहूँ किसको कहूँ
DrLakshman Jha Parimal
नाद अनहद
नाद अनहद
Dr.Pratibha Prakash
वक्त को वक्त समझने में इतना वक्त ना लगा देना ,
वक्त को वक्त समझने में इतना वक्त ना लगा देना ,
ज्योति
* राष्ट्रभाषा हिन्दी *
* राष्ट्रभाषा हिन्दी *
surenderpal vaidya
समस्या
समस्या
Paras Nath Jha
प्रेम तो हर कोई चाहता है;
प्रेम तो हर कोई चाहता है;
Dr Manju Saini
सवालात कितने हैं
सवालात कितने हैं
Dr fauzia Naseem shad
पत्र
पत्र
लक्ष्मी सिंह
फितरत
फितरत
kavita verma
मुस्कुराते रहो
मुस्कुराते रहो
Basant Bhagawan Roy
चातक तो कहता रहा, बस अम्बर से आस।
चातक तो कहता रहा, बस अम्बर से आस।
Suryakant Dwivedi
"अन्तर"
Dr. Kishan tandon kranti
आश्रम
आश्रम
Er. Sanjay Shrivastava
आँखें शिकायत करती हैं गमों मे इस्तेमाल हमारा ही क्यों करते ह
आँखें शिकायत करती हैं गमों मे इस्तेमाल हमारा ही क्यों करते ह
Vaishnavi Gupta (Vaishu)
भारत हमारा
भारत हमारा
Dr. Pradeep Kumar Sharma
केहरि बनकर दहाड़ें
केहरि बनकर दहाड़ें
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
आसमां पर घर बनाया है किसी ने।
आसमां पर घर बनाया है किसी ने।
डॉ.सीमा अग्रवाल
मैं पीपल का पेड़
मैं पीपल का पेड़
VINOD CHAUHAN
■ तंत्र का षड्यंत्र : भय फैलाना और लाभ उठाना।
■ तंत्र का षड्यंत्र : भय फैलाना और लाभ उठाना।
*Author प्रणय प्रभात*
Loading...