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17 Jun 2023 · 1 min read

दशरथ माँझी संग हाइकु / मुसाफ़िर बैठा

बाइस वर्ष
साधा माँझी ने
हाथ हथौड़ा

[2]
पहाड़ फाड़
दे निकाल रास्ता जो
बनता माँझी

[3]
अभावों से जो
आत्मविश्वास जगे
वो माँझी मन

[4]
ताजमहल
के जो पार श्रम है
माँझी प्रेम वो

[5]
उम्मीदों से भी
बड़ा है जो कद, है
वो पक्का माँझी

[6]
पता नहीं जो
अपना दम दाम
तब माँझी क्या

[7]
गिरि से ऊँचा
उसे ही लांघ बने
जो, माँझी वह

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