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21 Jun 2023 · 1 min read

तेरे लिखे में आग लगे / MUSAFIR BAITHA

तेरे लिखे में
अगर दुःख है
दुःख मगर सबका है

तो तेरे लिखे में आग लगे

सबका दुःख कोई ओढ़ नहीं सकता
ओढ़ना भी नहीं चाहिए

सब में से कुछ कुछ
कुछ को तो ना-हक़
दुःख देने वाला निकलेगा ही

किसी के ना-हक़ सुख में
साथ होना भी
जायज़ नहीं है बल्कि

सबका होना
सबके सुख दुःख में शामिल होना
दरियादिल होना नहीं है
अवसरवाद में रमने का
दूसरा नाम है यह!

Language: Hindi
136 Views
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