Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
6 Apr 2024 · 1 min read

“डगर”

“डगर”
जिन्दगी की डगर में
कितने साथी मिले और छूट गए,
रिश्ते-नाते बने यहाँ
कुछ निभे और कुछ टूट गए।

1 Like · 1 Comment · 46 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Dr. Kishan tandon kranti
View all
You may also like:
3114.*पूर्णिका*
3114.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
मैं चांद को पाने का सपना सजाता हूं।
मैं चांद को पाने का सपना सजाता हूं।
Dr. ADITYA BHARTI
बह्र-2122 1212 22 फ़ाइलातुन मुफ़ाइलुन फ़ैलुन काफ़िया -ऐ रदीफ़ -हैं
बह्र-2122 1212 22 फ़ाइलातुन मुफ़ाइलुन फ़ैलुन काफ़िया -ऐ रदीफ़ -हैं
Neelam Sharma
पुरानी खंडहरों के वो नए लिबास अब रात भर जगाते हैं,
पुरानी खंडहरों के वो नए लिबास अब रात भर जगाते हैं,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
फिर आई स्कूल की यादें
फिर आई स्कूल की यादें
Arjun Bhaskar
कर्मगति
कर्मगति
Shyam Sundar Subramanian
ग़ज़ल
ग़ज़ल
Mahendra Narayan
सावधानी हटी दुर्घटना घटी
सावधानी हटी दुर्घटना घटी
Sanjay ' शून्य'
नव वर्ष पर सबने लिखा
नव वर्ष पर सबने लिखा
Harminder Kaur
विचार
विचार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
*चिंता चिता समान है*
*चिंता चिता समान है*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
जलपरी
जलपरी
लक्ष्मी सिंह
अपनी बड़ाई जब स्वयं करनी पड़े
अपनी बड़ाई जब स्वयं करनी पड़े
Paras Nath Jha
Expectations
Expectations
पूर्वार्थ
सत्य तो सीधा है, सरल है
सत्य तो सीधा है, सरल है
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
"महान ज्योतिबा"
Dr. Kishan tandon kranti
हाशिए के लोग
हाशिए के लोग
Shekhar Chandra Mitra
तलाश
तलाश
Vandna Thakur
मै थक गया हु
मै थक गया हु
भरत कुमार सोलंकी
अमृत वचन
अमृत वचन
Dp Gangwar
पाकर तुझको हम जिन्दगी का हर गम भुला बैठे है।
पाकर तुझको हम जिन्दगी का हर गम भुला बैठे है।
Taj Mohammad
उजले दिन के बाद काली रात आती है
उजले दिन के बाद काली रात आती है
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
सुना है फिर से मोहब्बत कर रहा है वो,
सुना है फिर से मोहब्बत कर रहा है वो,
manjula chauhan
१.भगवान  श्री कृष्ण  अर्जुन के ही सारथि नही थे वे तो पूरे वि
१.भगवान श्री कृष्ण अर्जुन के ही सारथि नही थे वे तो पूरे वि
Piyush Goel
मिट्टी
मिट्टी
DR ARUN KUMAR SHASTRI
बीज और बच्चे
बीज और बच्चे
Manu Vashistha
चलो चलाए रेल।
चलो चलाए रेल।
Vedha Singh
तुम्हे तो अभी घर का रिवाज भी तो निभाना है
तुम्हे तो अभी घर का रिवाज भी तो निभाना है
शेखर सिंह
हाय री गरीबी कैसी मेरा घर  टूटा है
हाय री गरीबी कैसी मेरा घर टूटा है
कृष्णकांत गुर्जर
मुझे भी लगा था कभी, मर्ज ऐ इश्क़,
मुझे भी लगा था कभी, मर्ज ऐ इश्क़,
डी. के. निवातिया
Loading...