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21 Apr 2023 · 1 min read

“जाग दुखियारे”

“जाग दुखियारे”
जल जंगल जमीनें छीनी
छीनी जीवन धारा,
खेत-खलिहान भी छीने
छीना राज हमारा।
इंसानों की कदर न जाने
पत्थर पूजे सौ बारा,
जाग दुखियारे ऐसी सत्ता
आए न कभी दोबारा।

5 Likes · 2 Comments · 359 Views
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