Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Settings
Jul 8, 2016 · 1 min read

जगमगायेगा जुगनू मै ठानता हू माँ

मै तेरी हर बात दिल से मानता हू माँ !
तेरे दुःख दर्द सपने मै जानता हू माँ !!

वादा करता हू तुझसे वो कर जाउगा ,
जगमगायेगा जुगनू मै ठानता हू माँ !!

तेरे बताये मार्ग पर हि चल रहा ,
भाई को बच्चो सा पालता हू माँ !!

मेहनत इमानदारी दया कर रहा ,
पेड़ पौधों को पानी डालता हू माँ !

शब्द आते है दिल में पिरो देता हू ,
अपने आप को मै निखारता हू माँ !

जब याद आती है चुपके से रो लेता हू ,
दिन में दस बार तुझको निहारता हू माँ !!

169 Views
You may also like:
तू नज़र में
Dr fauzia Naseem shad
रावण का प्रश्न
Anamika Singh
सच्चे मित्र की पहचान
Ram Krishan Rastogi
आज नहीं तो कल होगा / (समकालीन गीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
गरम हुई तासीर दही की / (गर्मी का नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
" एक हद के बाद"
rubichetanshukla रुबी चेतन शुक्ला
पिता
Kanchan Khanna
ये दिल मेरा था, अब उनका हो गया
Ram Krishan Rastogi
✍️महानता✍️
'अशांत' शेखर
इंतज़ार थमा
Dr fauzia Naseem shad
पिता क्या है?
Varsha Chaurasiya
Life through the window during lockdown
ASHISH KUMAR SINGH
ठनक रहे माथे गर्मीले / (गर्मी का नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
Blessings Of The Lord Buddha
Buddha Prakash
पिता का प्रेम
Seema gupta ( bloger) Gupta
बुद्ध धाम
Buddha Prakash
✍️सूरज मुट्ठी में जखड़कर देखो✍️
'अशांत' शेखर
यह सिर्फ़ वर्दी नहीं, मेरी वो दौलत है जो मैंने...
Lohit Tamta
पिता
Deepali Kalra
.....उनके लिए मैं कितना लिखूं?
ऋचा त्रिपाठी
फीका त्यौहार
पाण्डेय चिदानन्द
गुमनाम मुहब्बत का आशिक
श्री रमण 'श्रीपद्'
सागर ही क्यों
Shivkumar Bilagrami
ज़िंदगी से सवाल
Dr fauzia Naseem shad
तप रहे हैं दिन घनेरे / (तपन का नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
मेरी भोली ''माँ''
पाण्डेय चिदानन्द
तपों की बारिश (समसामयिक नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
नदी को बहने दो
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
पिता के चरणों को नमन ।
Buddha Prakash
पिता का सपना
श्री रमण 'श्रीपद्'
Loading...