Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
11 Feb 2024 · 1 min read

चरम सुख

चरम सुख
(छंदमुक्त काव्य)

दैहिक चरम सुख और ब्रह्मस्वरूप परमानन्द,
चिरत्व किसमें है…
वही बता सकेगा न भला
जिसने बारी बारी से
दोनों का अनुभव किया है ।
तुलना तो तब ही न हो सकती है_
जब दोनों पास मौजूद हो
और हम अपनी इन्द्रियों से
उसका तुलनात्मक अनुभव कर सकें।
क्या इहलोक में यह संभव है कि…
चरमसुख और परमानन्द दोनों
बारी बारी से प्राप्त किया जा सके..
हाँ यह बिल्कुल सम्भव है…
परंच परमानंद प्राप्ति के लिए
छठी इन्द्रिय का होना आवश्यक है,
जो वैराग्य और भक्ति की महत्ता को जान सके।
ध्यान से सोचे तो_
पहले में बस क्षणिक सुखानुभूति है
पर वो भी आत्मिक नहीं,
दूसरा अनंत आनंद स्वरूप ब्रह्म..!
अतुलनीय है दोनों…
किन्तु पहला इतना मायावी है कि,
दूसरे की तरफ जाने की अनुमति ही नहीं देता।
फिर शुरू होती है पुनःचक्रण की श्रृंखला
माया और प्रकृति,एक ही तो है दोनों…
बस क्रियाशील और शांत का फर्क है दोनों में,
घूमते रहो बारंबार
जड़ से चेतन में_
फिर चेतन से जड़ में_
आहुति देनें के लिए ये शरीर हैं न,
खोजते रहो चरमसुख….

मौलिक एवं स्वरचित
सर्वाधिकार सुरक्षित
©® मनोज कुमार कर्ण
कटिहार (बिहार)

1 Like · 835 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from मनोज कर्ण
View all
You may also like:
वो नन्दलाल का कन्हैया वृषभानु की किशोरी
वो नन्दलाल का कन्हैया वृषभानु की किशोरी
Mahesh Tiwari 'Ayan'
आंखें भी खोलनी पड़ती है साहब,
आंखें भी खोलनी पड़ती है साहब,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
एक महिला तब ज्यादा रोती है जब उसके परिवार में कोई बाधा या फि
एक महिला तब ज्यादा रोती है जब उसके परिवार में कोई बाधा या फि
Rj Anand Prajapati
2) भीड़
2) भीड़
पूनम झा 'प्रथमा'
■ कोई तो बताओ यार...?
■ कोई तो बताओ यार...?
*प्रणय प्रभात*
शहरी हो जरूर तुम,
शहरी हो जरूर तुम,
Dr. Man Mohan Krishna
पड़ोसन की ‘मी टू’ (व्यंग्य कहानी)
पड़ोसन की ‘मी टू’ (व्यंग्य कहानी)
Dr. Pradeep Kumar Sharma
निबंध
निबंध
Dhirendra Singh
मास्टर जी का चमत्कारी डंडा🙏
मास्टर जी का चमत्कारी डंडा🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
करीब हो तुम किसी के भी,
करीब हो तुम किसी के भी,
manjula chauhan
*
*"ब्रम्हचारिणी माँ"*
Shashi kala vyas
"मेरी आवाज"
Dr. Kishan tandon kranti
बच्चे थिरक रहे हैं आँगन।
बच्चे थिरक रहे हैं आँगन।
लक्ष्मी सिंह
तेवरी
तेवरी
कवि रमेशराज
सिर्फ विकट परिस्थितियों का सामना
सिर्फ विकट परिस्थितियों का सामना
Anil Mishra Prahari
हर मसाइल का हल
हर मसाइल का हल
Dr fauzia Naseem shad
Yaade tumhari satane lagi h
Yaade tumhari satane lagi h
Kumar lalit
वतन के लिए
वतन के लिए
नूरफातिमा खातून नूरी
प्रभु श्रीराम
प्रभु श्रीराम
Dr. Upasana Pandey
नीला ग्रह है बहुत ही खास
नीला ग्रह है बहुत ही खास
Buddha Prakash
गीता जयंती
गीता जयंती
Satish Srijan
जिंदगी सितार हो गयी
जिंदगी सितार हो गयी
Mamta Rani
3443🌷 *पूर्णिका* 🌷
3443🌷 *पूर्णिका* 🌷
Dr.Khedu Bharti
*गाता है शरद वाली पूनम की रात नभ (घनाक्षरी: सिंह विलोकित छंद
*गाता है शरद वाली पूनम की रात नभ (घनाक्षरी: सिंह विलोकित छंद
Ravi Prakash
Don't get hung up
Don't get hung up
पूर्वार्थ
*रामलला का सूर्य तिलक*
*रामलला का सूर्य तिलक*
Ghanshyam Poddar
दुनियां में मेरे सामने क्या क्या बदल गया।
दुनियां में मेरे सामने क्या क्या बदल गया।
सत्य कुमार प्रेमी
ग़ज़ल(ज़िंदगी लगती ग़ज़ल सी प्यार में)
ग़ज़ल(ज़िंदगी लगती ग़ज़ल सी प्यार में)
डॉक्टर रागिनी
मुरली कि धुन
मुरली कि धुन
Anil chobisa
लोगों को जगा दो
लोगों को जगा दो
Shekhar Chandra Mitra
Loading...