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21 Aug 2023 · 1 min read

#ग़ज़ल

#ग़ज़ल
■ काली शब ने दिखलाए हैं वो मंज़र…!
【प्रणय प्रभात】

● जो सबकी नज़रों से छिप कर निकलेगा।
उसकी आस्तीन से खंज़र निकलेगा।।

● मेरा क़त्ल ज़रूरी है तो ये लिख लो।
मेरा क़ातिल मेरा रहबर निकलेगा।।

● क़ौमी यक़ज़हती की बातें बन्द करो।।
यहां से नेज़े लेकर लश्कर निकलेगा।।

● रस्सी है रस्सी है तुम ही कहते थे।
हमको कल ही पता था अजगर निकलेगा।।

● शाहिद झूठ बोलने में गर अव्वल है।
तो फिर तय है क़ातिल बचकर निकलेगा।।

● उसने अपना सब कुछ जिसको माना था।
पता न था शैतान से बदतर निकलेगा।।

● काली शब ने दिखलाए हैं वो मंज़र।
सूरज भी अब तो डर-र्डर कर निकलेगा।।

● शीशे के घर के जितने वाशिंदे हैं।
उनकी मुट्ठी से भी पत्थर निकलेगा।।

● जब-जब उन आंखों से बरसेगा सावन।
तब-तब मेरा दामन भी तर निकलेगा।।

★संपादक/न्यूज़&व्यूज़★
श्योपुर (मध्यप्रदेश)

1 Like · 138 Views
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