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10 Jun 2023 · 1 min read

किस पथ पर उसको जाना था

भूल गयी वो अपनी मंजिल
किस पथ पर उसको जाना था
शोर भरे सन्नाटों में ना जाने
कब उसको खो जाना था
तलाश रही आज वो अपनी वजूद
किस पथ पर उसको जाना था।

थम गई साँसों की डोर
धड़कन में मची थी शोर
चांद की ओर चकोर वो देखती
देख फिर मन में मुस्काती
मृग तृष्णा से भरी जिंदगी
क्षणभंगुर छलावा था
भूल गयी वो अपनी मंजिल
किस पथ पर उसको जाना था

मन मस्तिष्क में युद्ध छिड़ा
मन कुछ यूँ बेसहारा था
गिरता संभलता फिर खड़ा होता
किस पथ पर उसको जाना था

ममता रानी

1 Like · 388 Views
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