Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
2 Feb 2022 · 3 min read

*”ममता”* पार्ट-3

गतांक से आगे…
अगले दिन शनिवार था, इसलिए राजेश को भी छुट्टी थी, दिन भर सब अपने अपने काम में व्यस्त थे. शाम को 5 बजे दोनों पति-पत्नी पड़ौसी दादाजी के घर जाने के लिए जैसे ही घर से निकले तो उन्होंने देखा कि दादाजी के घर के आगे भीड़ जमा हो रही है, तब उन्हें याद आया कि बात तो कल ही फ़ैल गई थी पुरे मौहल्ले में, इसलिए आज सब लोग देखने के लिए जमा हुए हैं. सरिता को लज्जा आने लगी. वे दोनों घर के अन्दर आये तो दादाजी, दादीजी सहित कई मौहल्ले वालों को इन्तजार करते पाया. राजेश ने सभी बड़ों का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया और अन्य का हंस कर अभिवादन किया. एक बैंक मेनेजर होते हुए भी वो अपने संस्कारों का पालन कर रहा है इसी बात को लेकर लोग मन ही मन उसकी प्रशंसा कर रहे थे. दादीजी ने बहू को बाल्टी दी और गाय के पास जाने का आदेश दिया, सरिता ने इशारों में इतने लोगों की उपस्थिति के बारे में पूछा तो उन्होंने इशारों में ही अनदेखा करने का इशारा किया. जैसे ही सरिता गाय के पास पहुंची गाय के हाव-भाव बदल गए ऐसा लग रहा था मानो वो उसी का इन्तजार कर रही थी. सरिता ने पिछले दिनों की तरह जैसे ही बाल्टी रख कर गाय दुहने का प्रयास किया सबने देखा थनों से दूध अपने आप निकलने लगा. सभी लोग (पुरुष, महिलाएं, छोटे बड़े) अचम्भे में आ गए.
इस माहौल में कब बाल्टी भर गई पता ही नहीं चला मगर दूध अभी भी आ रहा था, किसी ने घर के अन्दर से दूसरी बाल्टी लाकर गाय के नीचे रखी तो वो भी भरने लगी, कोई तीसरी बाल्टी ले आया फिर भी दूध बंद नहीं हो रहा था. लागों को चिंता होने लगी कि गाय को कोई बीमारी तो नहीं लग गई है. तभी जोर से आवाज आई “अलख निरंजन” लोगों ने पीछे मुड़ कर देखा तो एक महात्मा खड़े थे. पूछने पर भीड़ ने उन्हें पूरी बात बताई, वे फिर बोले “अलख निरंजन” इस बार गाय का बछड़ा जो शांत खड़ा था वो उस अलख निरंजन की आवाज की तरफ देख कर मचलने लगा. लोगों का आश्चर्य और बढ़ गया इस दौरान तीसरी बाल्टी भी भरने लगी तो महात्मा जी ने जोर से आवाज लगाईं “बेटी बाल्टी हटा लो, दूध अपने आप बंद हो जाएगा” सरिता ने जैसे ही बाल्टी हटाई सचमुच थनों से दूध आना बंद हो गया. इतना दूध देने के बाद भी गाय के थन भरे हुए थे, मानो उसकी और दूध देने की इच्छा है. और महात्मा जी को देख कर उस बछड़े की उछलकूद और तेज हो गई. महात्मा जी गौशाला में आये उन्होंने बछड़े के सिर पर जैसे ही अपना हाथ रखा वो पहले की तरह शांत हो गया. अब तो लोगों के आश्चर्य की कोई सीमा ही नहीं रही. दादाजी ने महात्मा जी को बड़े ही आदर के साथ घर के भीतर बुलाकर उचित आसन दिया और इस घटना के बारे कुछ बताने का आग्रह किया.
महात्माजी दादाजी के इस अनुग्रह पूर्वक व्यवहार से बड़े प्रसन्न दिखे, उन्होंने कहा यजमान ये एक बहुत पुरानी घटना का प्रतिफल है बल्कि यूँ कहूँ कि ये किसी पिछले जन्म की एक घटना का प्रतिफल है तो ज्यादा सही रहेगा. क्रमशः …

1 Like · 681 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
असहाय मानव की पुकार
असहाय मानव की पुकार
Dr. Upasana Pandey
प्यार दर्पण के जैसे सजाना सनम,
प्यार दर्पण के जैसे सजाना सनम,
लक्ष्मी वर्मा प्रतीक्षा
विपत्ति आपके कमजोर होने का इंतजार करती है।
विपत्ति आपके कमजोर होने का इंतजार करती है।
Paras Nath Jha
एक दूसरे से कुछ न लिया जाए तो कैसा
एक दूसरे से कुछ न लिया जाए तो कैसा
Shweta Soni
बँटवारा
बँटवारा
Shriyansh Gupta
चंचल मन चित-चोर है , विचलित मन चंडाल।
चंचल मन चित-चोर है , विचलित मन चंडाल।
Manoj Mahato
वो पढ़ लेगा मुझको
वो पढ़ लेगा मुझको
Dr fauzia Naseem shad
दर्पण में जो मुख दिखे,
दर्पण में जो मुख दिखे,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
ऐसे नाराज़ अगर, होने लगोगे तुम हमसे
ऐसे नाराज़ अगर, होने लगोगे तुम हमसे
gurudeenverma198
पीपल बाबा बूड़ा बरगद
पीपल बाबा बूड़ा बरगद
Dr.Pratibha Prakash
फूल और तुम
फूल और तुम
Sidhant Sharma
अद्भुद भारत देश
अद्भुद भारत देश
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
"लफ़्ज़ भी आन बान होते हैं।
*Author प्रणय प्रभात*
तू है तसुव्वर में तो ए खुदा !
तू है तसुव्वर में तो ए खुदा !
ओनिका सेतिया 'अनु '
अमीरों का देश
अमीरों का देश
Ram Babu Mandal
नये साल में
नये साल में
Mahetaru madhukar
तपाक से लगने वाले गले , अब तो हाथ भी ख़ौफ़ से मिलाते हैं
तपाक से लगने वाले गले , अब तो हाथ भी ख़ौफ़ से मिलाते हैं
Atul "Krishn"
"चुलबुला रोमित"
Dr Meenu Poonia
तन्हाई
तन्हाई
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
मातृशक्ति
मातृशक्ति
Sanjay ' शून्य'
फर्ज मां -बाप के याद रखना सदा।
फर्ज मां -बाप के याद रखना सदा।
Namita Gupta
*यौगिक क्रिया सा ये कवि दल*
*यौगिक क्रिया सा ये कवि दल*
DR ARUN KUMAR SHASTRI
गुरु ही वर्ण गुरु ही संवाद ?🙏🙏
गुरु ही वर्ण गुरु ही संवाद ?🙏🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
आंखों की चमक ऐसी, बिजली सी चमकने दो।
आंखों की चमक ऐसी, बिजली सी चमकने दो।
सत्य कुमार प्रेमी
मजदूर दिवस पर
मजदूर दिवस पर
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
सत्य की खोज
सत्य की खोज
Dheerja Sharma
अभी अभी तो इक मिसरा बना था,
अभी अभी तो इक मिसरा बना था,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
स्वीकारा है
स्वीकारा है
Dr. Mulla Adam Ali
......... ढेरा.......
......... ढेरा.......
Naushaba Suriya
रंजीत कुमार शुक्ल
रंजीत कुमार शुक्ल
Ranjeet Kumar Shukla
Loading...