Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
26 Apr 2023 · 1 min read

“कबड्डी”

“कबड्डी”
कबड्डी की तो बात निराली
हर खेल से न्यारा,
जज्बा जगाते ग़ज़ब के यारों
बच्चों को लगता प्यारा।
गली मोहल्लों में खेलते दिखते
बच्चों की कई टोलियाँ,
पकड़ो वापस जाने ना दो उसे
फाउल पॉइंट कई बोलियाँ।

5 Likes · 2 Comments · 289 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Dr. Kishan tandon kranti
View all
You may also like:
कॉलेज वाला प्यार
कॉलेज वाला प्यार
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
उर्दू
उर्दू
Surinder blackpen
रिश्ते
रिश्ते
पूर्वार्थ
बचपन
बचपन
लक्ष्मी सिंह
कहाँ जाऊँ....?
कहाँ जाऊँ....?
Kanchan Khanna
आशा
आशा
Sanjay ' शून्य'
औरों की उम्मीदों में
औरों की उम्मीदों में
DEVSHREE PAREEK 'ARPITA'
कहां गए बचपन के वो दिन
कहां गए बचपन के वो दिन
Yogendra Chaturwedi
भगवान परशुराम जी, हैं छठवें अवतार
भगवान परशुराम जी, हैं छठवें अवतार
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
*आदत*
*आदत*
DR ARUN KUMAR SHASTRI
3275.*पूर्णिका*
3275.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
आपके आसपास
आपके आसपास
Dr.Rashmi Mishra
कबीर: एक नाकाम पैगंबर
कबीर: एक नाकाम पैगंबर
Shekhar Chandra Mitra
उसकी गली से गुजरा तो वो हर लम्हा याद आया
उसकी गली से गुजरा तो वो हर लम्हा याद आया
शिव प्रताप लोधी
* सामने आ गये *
* सामने आ गये *
surenderpal vaidya
कैसे प्रियवर मैं कहूँ,
कैसे प्रियवर मैं कहूँ,
sushil sarna
தனிமை
தனிமை
Shyam Sundar Subramanian
गरम कचौड़ी यदि सिंकी , बाकी सब फिर फेल (कुंडलिया)
गरम कचौड़ी यदि सिंकी , बाकी सब फिर फेल (कुंडलिया)
Ravi Prakash
दोस्ती ना कभी बदली है ..न बदलेगी ...बस यहाँ तो लोग ही बदल जा
दोस्ती ना कभी बदली है ..न बदलेगी ...बस यहाँ तो लोग ही बदल जा
DrLakshman Jha Parimal
*अज्ञानी की कलम*
*अज्ञानी की कलम*
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
**हो गया हूँ दर बदर चाल बदली देख कर**
**हो गया हूँ दर बदर चाल बदली देख कर**
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
वह एक वस्तु,
वह एक वस्तु,
Shweta Soni
काश कही ऐसा होता
काश कही ऐसा होता
Swami Ganganiya
सरल मिज़ाज से किसी से मिलो तो चढ़ जाने पर होते हैं अमादा....
सरल मिज़ाज से किसी से मिलो तो चढ़ जाने पर होते हैं अमादा....
कवि दीपक बवेजा
किस्मत की लकीरें
किस्मत की लकीरें
umesh mehra
#मुक्तक
#मुक्तक
*Author प्रणय प्रभात*
कश्ती औऱ जीवन
कश्ती औऱ जीवन
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
चांद पर उतरा
चांद पर उतरा
Dr fauzia Naseem shad
निराशा हाथ जब आए, गुरू बन आस आ जाए।
निराशा हाथ जब आए, गुरू बन आस आ जाए।
डॉ.सीमा अग्रवाल
वक़्त बदल रहा है, कायनात में आती जाती हसीनाएँ बदल रही हैं पर
वक़्त बदल रहा है, कायनात में आती जाती हसीनाएँ बदल रही हैं पर
Sukoon
Loading...