Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
5 May 2024 · 1 min read

अपनी मिट्टी की खुशबू

आज भी अपने गांव की मिट्टी मन को बहुत लुभाती है।
रह-रह कर यादों में बरबस खींच मुझे ले जाती है।।

गांव , खेत, खलिहान छोड़कर दूर देश क़ो आई हूं,
मां के हाथ बनी चूल्हे की रोटी बहुत लुभाती है।

मां- बाबा भैया- बहनों से दूर अनजान जगह पर आई हूं,
रिश्तो की मीठी सौगातें, हर दिन मुझे रुलाती है।

गुड्डे गुड़िया का वह खेल सखियों के संग बीते पल,
आज भी बचपन की वो यादें अपने पास बुलाती है।

कहने को तो सब कुछ लेकिन वह प्रेम नहीं मिलता ,
अपनेपन की सिसकी सीली लकड़ी सी सुलगाती है।

‘पराए घर की रोटी’ का सबक जब तुम मां!देती थी,
शब्दों में छिपी तेरी चिंता ,पाठ नया सिखलाती है।

बारिश में बूंदों के संग उठती मिट्टी की वो सोंधी खुशबू,
मन को घायल बेचैन करे वह मायके तक ले जाती है।

अपने गांव ,देश की मिट्टी का मैया ! कोई मोल नहीं,
तेरी गोद में सर रखकर ,सोने को बहुत अकुलाती है।

Language: Hindi
3 Likes · 46 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
किसी भी वार्तालाप की यह अनिवार्यता है कि प्रयुक्त सभी शब्द स
किसी भी वार्तालाप की यह अनिवार्यता है कि प्रयुक्त सभी शब्द स
Rajiv Verma
तुमसे मिलने पर खुशियां मिलीं थीं,
तुमसे मिलने पर खुशियां मिलीं थीं,
अर्चना मुकेश मेहता
Rakesh Yadav - Desert Fellow - निर्माण करना होगा
Rakesh Yadav - Desert Fellow - निर्माण करना होगा
Desert fellow Rakesh
*गोरे से काले हुए, रोगों का अहसान (दोहे)*
*गोरे से काले हुए, रोगों का अहसान (दोहे)*
Ravi Prakash
पछतावे की अग्नि
पछतावे की अग्नि
Neelam Sharma
3126.*पूर्णिका*
3126.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
श्री गणेश वंदना
श्री गणेश वंदना
Kumud Srivastava
ज़िंदगी जीने के लिये क्या चाहिए.!
ज़िंदगी जीने के लिये क्या चाहिए.!
शेखर सिंह
विकल्प
विकल्प
Dr.Priya Soni Khare
दिनकर/सूर्य
दिनकर/सूर्य
Vedha Singh
वक्त को यू बीतता देख लग रहा,
वक्त को यू बीतता देख लग रहा,
$úDhÁ MãÚ₹Yá
सब बिकाऊ है
सब बिकाऊ है
Dr Mukesh 'Aseemit'
हंसगति
हंसगति
डॉ.सीमा अग्रवाल
रिसाय के उमर ह , मनाए के जनम तक होना चाहि ।
रिसाय के उमर ह , मनाए के जनम तक होना चाहि ।
Lakhan Yadav
"जल"
Dr. Kishan tandon kranti
कहीं  पानी  ने  क़हर  ढाया......
कहीं पानी ने क़हर ढाया......
shabina. Naaz
*
*"तुलसी मैया"*
Shashi kala vyas
जिन्दगी से भला इतना क्यूँ खौफ़ खाते हैं
जिन्दगी से भला इतना क्यूँ खौफ़ खाते हैं
Shweta Soni
लड़कियां गोरी हो, काली हो, चाहे साँवली हो,
लड़कियां गोरी हो, काली हो, चाहे साँवली हो,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
बात बनती हो जहाँ,  बात बनाए रखिए ।
बात बनती हो जहाँ, बात बनाए रखिए ।
Rajesh Tiwari
जो भूलने बैठी तो, यादें और गहराने लगी।
जो भूलने बैठी तो, यादें और गहराने लगी।
Manisha Manjari
5) कब आओगे मोहन
5) कब आओगे मोहन
पूनम झा 'प्रथमा'
सफ़ारी सूट
सफ़ारी सूट
Dr. Pradeep Kumar Sharma
"सूर्य -- जो अस्त ही नहीं होता उसका उदय कैसे संभव है" ! .
Atul "Krishn"
वो वक्त कब आएगा
वो वक्त कब आएगा
Harminder Kaur
स्मृति ओहिना हियमे-- विद्यानन्द सिंह
स्मृति ओहिना हियमे-- विद्यानन्द सिंह
श्रीहर्ष आचार्य
अर्थी चली कंगाल की
अर्थी चली कंगाल की
SATPAL CHAUHAN
हकीकत
हकीकत
dr rajmati Surana
हज़ार ग़म हैं तुम्हें कौन सा बताएं हम
हज़ार ग़म हैं तुम्हें कौन सा बताएं हम
Dr Archana Gupta
■ जीवन सार...
■ जीवन सार...
*प्रणय प्रभात*
Loading...