वीर सैनिक की एक छोटी दास्तां

हे वीर ! आज मैं तुम्हारी एक कहानी लिखता हूं
मौत से मुक्त एक जिंदगी की रवानी लिखता हूं
जो राम सा जीवन भर काटता वनवास है
उसके कर्मों को मैं बस सलामी लिखता हूं
हे वीर ! आज मैं तुम्हारी एक कहानी लिखता हूं
जो मर के भी कभी मिटता नहीं जहां से
उसके संघर्षों की मैं बस एक कहानी लिखता हूं
जो वतन के खातिर हाजिर रखता सदा जान है
जिसके बिन शांति न संभव पूरी इस दुनिया में
उस वीर के योगदान को ,उस वीर के बलिदान को
उस वीर के साहस, हिम्मत और जज्बे को
मैं बस एक शब्द में, सलामी लिखता हूं
हे वीर ! आज मैं तुम्हारी एक कहानी लिखता हूं
जो युग युग तक मर मर के चैन तुम्हें दे जाता है
उसके इस सत्कर्मों को, जीत देश की लिखता हूं
जो अपने घर को छोड़कर देश को घर समझता है
उसके हर कर्मों को मैं बस सलामी लिखता हूं
हे वीर ! आज मैं तुम्हारी एक कहानी लिखता हूं