*नूतन वर्ष व नवरात्रि की मंगलकामनाएं*

#चैत्र_शुक्ल_प्रतिपदा
■ दिवस एक : प्रसंग अनेक।
●गर्व करें निज गौरव पर●
[प्रणय प्रभात]
अपने में अनेक सुखद प्रसंगों को समाहित किए किसी एक दिवस का स्मरण किया जाए तो वह एकमात्र दिवस है “चैत्र शुक्ल प्रतिपदा।” इस एक दिवस से जुड़े अनेक पर्व व प्रसंग न केवल हर्षोल्लास उपजाते हैं, वरन अपनी चिरंतन धर्म-संस्कृति पर गौरव का आभास भी कराते हैं। गौरवान्वित करते हैं उस विराट संस्कृति से सम्बद्धता को लेकर, जो शाश्वत है।
वर्ष प्रतिपदा के रूप में पहचान रखने बाले इस दिवस-विशेष की जानकारी भावी पीढ़ी को दिया जाना परम आवश्यक है। ताकि उन्हें भी अपनी महान धर्म-संस्कृति को लेकर गौरव की अनुभूति हो और वे इस दिन की गरिमा को समझ व सहेज सकें। इस एक दिवस का सरोकार कितने प्रसंगों से है, यह जानकारी प्रत्येक धर्मनिष्ठ सनातनी ही नहीं हर भारतवासी को होनी चाहिए।
पितामह ब्रह्मा द्वारा सृष्टि की रचना, चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य के राज्याभिषेक, वरुणावतार भगवान श्री झूलेलाल तथा महर्षि गौतम के अवतरण, चैत्री नवरात्र पर्व के मंगलाचरण, नव सम्वत्सर (विक्रम संवत/हिन्दू नववर्ष) के श्रीगणेश, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक व आद्य सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की जयंती, दक्षिण भारतीय उत्सव गुड़ी-पड़वा व चैती चाँद जैसे पर्व को अपने में समेटे वर्ष प्रतिपदा के इस दिन पर आत्मगौरव की अनुभूति स्वाभाविक है।
आइए, हम इस गौरवशाली दिवस को गरिमामयी उमंग व उल्लास के साथ मनाएं। अपने घरों व प्रतिष्ठानों पर धर्मध्वजा फहराएं। घर-द्वार को पताकाओं, बन्दनवारों, पुष्पहारों सहित रंगोली व शुभ-मंगल के प्रतीक चिह्नों से सजाएं। दिवस काल का श्रीगणेश स्नान-ध्यान व देव-दर्शन के उपरांत दान-पुण्य के साथ करें। परस्पर तिलक अंकित कर शुभकामनाओं का आदान-प्रदान करें। जीव-दया सहित शुभ कर्मों का पावन संकल्प लें तथा जगत-जननी मां जगदम्बा की दिव्य अगवानी के साथ भारतीय नूतन वर्ष का भव्य अभिनंदन करें। इति शुभम।।
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-सम्पादक-
न्यूज़&व्यूज (मप्र)