अपना नव वर्ष

उत्कर्ष, हर्ष, मधुमास लिये ,
भर प्रेम भक्ति विश्वास हिये।
है चैत्र शुक्ल की प्रतीपदा,
जो सनातनी नववर्ष सदा।
करके प्रदक्षिणा घूम घूम,
नौ शक्ति मनाओ झूम झूम।
नवरात्रि पर्व मन को भाया।
नव वर्ष हमारा है आया।
नवरात्री तो है ही जिसमें,
सङ्ग राम जन्म उत्सव इसमें।
भारतीय वर्ष का है ये क्रम।
आया ‘सिद्धार्थ’ सम्वत विक्रम।
ईसवी ही न बस याद करो,
सम्वत को भी आबाद करो।
एक जुट हिन्दू बन रहना है,
‘शुभ सम्वत’ मन से कहना है।