चौपाला छंद:- नवरात्रे आए

माता के शुभ नवरात्रे आए।
खुशियों की हैं पावन निधि लाए।।
पहले दिवस कलश स्थापित होवे।
साधक मनोकामना जौ बोवे।।
ज्योति मातु की बहु भक्त जलाते।
मन मंदिर में हैं उन्हें बिठाते।।
सत्य भाव से नित पूजन करते।
ध्यान मातु का हैं हरपल धरते।।
मातु शैल पुत्री पहले आतीं।
भक्तों का सारा साज सजातीं।।
भोग खीर का जो भक्त लगाता।
कृपा मातु की वह अनुपम पाता।।
वृषभ सवारी माता को प्यारी।
होती जो है जग की हितकारी।।
मातु शैल को जो साधक ध्याता।
सुख वैभव से सजता तत् नाता।।
शैल सुता माँ को ओम बुलाए।
शब्द पुष्प का शुभ हार चढ़ाए।।
मातु कृपा कर हर साज सजातीं।
धन यश विद्या शुभता बरसातीं।।
डॉ ओम प्रकाश श्रीवास्तव ओम
शिक्षक व साहित्यकार
तिलसहरी,कानपुर नगर