सृष्टिकार करतार है, राघव हरि अवतार।

सृष्टिकार करतार है, राघव हरि अवतार।
मान इसे ही लोग तो,देते कर्म नकार।।
देश बँटा ले जात को, स्वाद किये विस्तार।
राघव का वैराग्य तो, हुआ सभी बेकार।।
अंधभक्त जनता हुई, नेता खेवनहार।
संविधान सर्वोच्च है,जिसे जाति से प्यार।।
संजय निराला