मुद्दा

मुद्दे की बात बिगड़ जाए जब,
ये मुद्दा कहाँ से पकड़ के लाए,
छोड़ो सब है बेकार की बातें,
किसी और मुद्दे में बात चलाए अब।
मुद्दा क्या है? क्या है गम्भीरता इसकी।
इत्मीनान से समझ न पाए जब,
कोई कमियाँ निकल आए सामने,
छुपाने को मुद्दा हटाया जाए तब।
मुद्दा जब तक बनेगा नहीं इतिहास,
कौन जाने कब हुई थी,
किसी मुद्दे पे बेशक बात,
वरना मुद्दा तो आया ,हो गया तुरंत खाक।
रचनाकार
बुद्ध प्रकाश
मौदहा हमीरपुर।