अजन्मे जीवन की पुकार

अजन्मे जीवन की पुकार
#नन्ही_धड़कन_मीठी_आस, कोख में पलती एक सुगंध खास।
नव किरण सी मुस्कान सहेजे सतरंगी जीवन अहसास।
माँ की गोदी, सपनों का संसार,क्यों छीन रहे हो उसका अधिकार?
हर धड़कन में बसती कहानी, मत छीनो उसकी जिंदगानी।
कभी वो हँसी, कभी वो गीत,कभी सुकर्म का सुंदर मीत।
उसका भी है दुनिया में स्थान, उसका भी है जीने का मान।
नन्हीं किलकारी जो गूँज न पाई, माँ की ममता जो खिल न पाई।
क्यों छीन लिया वो कोमल हाथ,जो थामते तेरा हरदम साथ?
जीवन का हक़ है हर शिशु का, सपनों से भी उसका रिश्ता गाढ़ा।
क्यों बुझा दी वो रोशनी प्यारी, क्यों नन्हें जीवन को गाड़ा।
सोचो, समझो “नीलम” ज़रा, क्या है सही, क्या है ख़रा?
जीवन की लौ जलने दो, हर नन्हें फूल को खिलने दो।
नीलम शर्मा ✍️