प्रकृति के प्रहरी

धरती की गोद में जो हरियाली सजाते हैं,
अनोप भाम्बू और दिनेश चौहान कहलाते हैं।
वन्य जीवों का प्रेम है जिनकी पहचान,
प्रकृति की सेवा में जिनका है मान।
बंबोर की माटी में अनोप का संग है,
हर वृक्ष की छाया में प्रेम का रंग है।
रामदेवरा की रेत में दिनेश की बात,
जहाँ पर्यावरण को मिले नई सौगात।
पंछियों की चहचहाहट में है दोनों की जान,
धरती का आंचल हो सदा हरा-भरा जहान।
हर पत्ता बोले एक नई जुबान,
साँसों में घुलती रहे हरियाली की शान।
जहाँ हवा बहती हो खुशबू लिए,
प्रकृति का प्यार दोनों ने जिया।
अनोप भाम्बू, दिनेश चौहान का ये प्रण,
धरती रहे सुंदर, ये सेवा रहे अनंत।
— डॉक्टर बीएल सैनी
श्रीमाधोपुर सीकर राजस्थान