भारत मां के लाल
मरते तो सभी हैं ,
पर शहीद वहीं होते हैं।
जिनका लहू देश की मिटृटी में मिलता है।
और उससे भी ज्यादा सौभाग्य शाली वो हैं,
जो हंसते हंसते भारत मां के लिए
फांसी के झूले पे झूल गए।
राजगुरू, सुखदेव ,भगतसिंह,
को आज मिलीं थीं फांसी।
कैसे भूलेगा इस दिन को,
हर एक भारतवासी।
अपने प्राणों को हंसकर,
बलिदान किया इन तीनों ने।
देश की रक्षा के खातिर,
झूले फांसी के झूले पर।
स्वतंत्रता की बेदी में,
जब अपनी आहुति डाली थी।
भारत में फिर फैल गयी,
आजादी की चिंगारी थी।
इंकलाब के नारों से,
भारत का कण कण गूंजा था।
देख वीरता इन वीरों की,
अग्रेंजों का शासन डोला था।
सच्चे देशभक्त थे वो,
आजादी के मतवाले।
बांध कफ़न निकले थे सर पर,
हार नहीं थी वो माने।
अपने लहु का एक एक कतरा,
कर दिया देश के नाम।
झूले फांसी के झूले पर,
ले भारत मां का नाम।
धन्य धन्य उस मां की कोख है ,
जो जन्मी ऐसे लाल।
धन्य हमारी भारत भूमि,
जहां जन्मे ये वीर जवान।
रुबी चेतन शुक्ला
अलीगंज
लखनऊ