लेता हैं किसान कर्ज मे ही जन्म ,

लेता हैं किसान कर्ज मे ही जन्म ,
जीता हैं किसान कर्ज मे ही पूरी जिंदगी,
और प्राण त्याग देता हैं किसान कर्ज मे ही,
नहीं जानता वो की आराम क्या होता हैं,
नहीं जानता वो की सुकून क्या होता हैं,
नहीं जानता वो की नींद क्या होती हैं…. ;
बस दिन रात किसान हर पल लगे रहता सबके पेट भरने के लिए फसले, अनाज तैयार करने मे, ताकि कोई अनाज के अभाव मे न तरसे…;
ठण्डी, गर्मी, बारिश, आँधी, तूफान मे भी डटे रहते हैं ताकि ना हो फसल खराब,
रहता हैं शरीर पर किसानों के एक पतला सा पुराने फटे बनियान और धोती,
फिर भी रहता चेहरे पर सदा मुस्कान,
नहीं रहती उसे शिकायत बस जैसा जो मिल जाता रह लेता उसी मे खुश…..;
लेता हैं किसान कर्ज मे ही जन्म ,
जीता हैं किसान कर्ज मे ही पूरी जिंदगी,
और प्राण त्याग देता हैं किसान कर्ज मे ही……!!
प्रियंका वर्मा……. ✍️