मोटापे की मार। हास्य व्यंग रचना। रचनाकार: अरविंद भारद्वाज

एक मोटा आदमी अपनी पतली बीबी के साथ, घूमने जा रहा था
लग रहा था सड़क पर रोडरोलर से, बहुत कंपन आ रहा था
बीबी की उंगली थी पकड़ी, सड़क पर हिलोरे खा रहा था
बीबी को बोला धीरे चलो, उसे हाँफते हुए साँस नहीं आ रहा था
थोड़ी सी दूर चलकर अचानक, बीबी की सहेली टकराई
बीबी बोली प्यारी सहेली, बडे दिन बाद मेरी याद आई
चेहरे पर हँसी लेकर सहेली, मन-मन में थोड़ी मुस्काई
सूमो पहलवान साथ रखा है, वाह तुममें भी सुरक्षा बढ़ाई
बीबी बोली मेरे पति की गज सी काया है, मेरे नसीब में ये ही आया है
दुकान चलाते पिज्जा की आधा बेचा, और आधा खुद ही खाया है
कहते है मोटापा को उस प्रभु की माया, उसी ने बनाई यह सुडौल काया है
इनका मानना है कि लाखों करोड़ो खाकर, अपना पेट बढ़ाया है
दुबली-पतली मेरी सहेली शर्म तुम्हें नहीं आई, दो आदमियों की तुझमें चर्बी समाई
सुंदर शरीर देखकर तुमसे शादी रचाई, तुमने तो शरीर में रजाई सी भरवाई
कद्दू जैसे फूल गए हो प्यारे जीजा जी, शरीर से कई जगह चर्बी निकल आई
लगता है बहन को भूखी रखते हो, उसके हिस्से की सारी रोटी तुमनें ही खाई
पति सोच में पड़ गया , मोटापे से ध्यान कैसे इसका हटाऊँ
सहेली तो मेरे पीछे ही पड गई, इसे जल्दी से कैसे भगाऊँ
उसने कहा शायद तुम जानती नहीं, तुम्हारा पति मेरे यहाँ करता है नौकरी
दिन की जगह उसे आज ही, रात की शिफ्ट में काम लगाऊँ
अपने पति पर मुसीबत आते देख , साली के चेहरे पर थोड़ी सी मुस्कुराहट आई
बहन तुम्हारा पति तो फिल्मी सितारा है, जोर से वह चिल्लाई
जीजा जी थोड़े दुबले पतले हो गए हैं, इनका ध्यान रखो
सहेली को दी बहुत बधाई, और फिर देर हो गई कहकर उसे अपने घर की याद आई
© अरविंद भारद्वाज