दुनिया
दुनिया
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मिलेंगे कभी
यूँ ही भटकते हुए
फिर तुमको
दुनिया बहुत बड़ी है
और गोल भी है
याद रखना
अपनी हरकतें इतनी अच्छी
जरूर रखें
कि
जब मिलें तो हममें से कोई भी
शर्मिंदा ना हो
मिलें ऐसे
जैसे कि जिये हों
एक पूरी ज़िंदगी
एक दूजे के लिए।
–अनिल कुमार मिश्र,राँची,झारखंड,भारत