धुआं बया करता है दर्द

धुआं बया करता है दर्द
राख निशानियां छोड़ जाती है,
किसी की
गुफ़्तगू में भी दम नही होता,
किसी की
ख़ामोशी फ़साने छोड़ जाती हैं.
हिमांशु Kulshrestha
धुआं बया करता है दर्द
राख निशानियां छोड़ जाती है,
किसी की
गुफ़्तगू में भी दम नही होता,
किसी की
ख़ामोशी फ़साने छोड़ जाती हैं.
हिमांशु Kulshrestha