”सोचता हूं उसके बारे में”
अब तो किसी को इश्क़ की नजर से
देखने की चाहत नही होती
फिर भी देख लिया करतें हैं कि
कहीं तुम्हारी झलक दिख जाए…
अब तो किसी से बात ए इश्क करने का
मन नहीं करता
लेकिन कर लिया करतें हैं कि
कहीं तुम्हारी आवाज़ सुनने को मिल जाए…
तुम्हारे बाद अब तो कोई पसंद भी नहीं आती
फिर भी थोड़ा ताल्लुक रखतें हैं कि
शायद हम किसी की पसंद बन जाए…
शिव प्रताप लोधी