” इन्सान ,

” इन्सान ,
घर बदलता है …
लिबास बदलता है …
रिश्ते बदलता है …
दोस्त बदलता है …
फिर भी परेशान रहता है ….
क्योकि वो खुद को नहीं बदलता … ”
किसी ने सच ही कहा है…
” उम्र भर ग़ालिब यही भूल करता रहा ,
धूल चहेरे पे थी और आईना साफ करता रहा !!! “