भारत का राम

वो राम जो बसा है कण कण में
और है मेरे मन में
रचा है उसे किस कवि ने
या है वो स्वयंभू ईश्वर
समाये हुए स्वयं में सारे भाव
काव्य में उलझे तर्क
किसने किसको जन्मा
तर्क ने भाव को या भाव ने तर्क को
कौन जाने
पर ये जन्मा मेरी मिटी में
हर जन्म में बुना मर्यादाओं को
समझा स्वतंत्रता को
बार बार उस कथा को जिया
नए शब्दों के सहारे
भारत
तूँ संभाल अपने राम को
बहुत कुछ स्वयं ही संभल जायगा।
—-शशि महाजन