बात आज भी होती हैं उनसे

बात आज भी होती हैं उनसे
दिन में चार daafaa पर अब उनके लहजे में वो बात नहीं…..
ग़र ऐसा चलता रहा मेरी जान
गुम हो जाऊँगी में अंधेरे में एक दिन कहीं ना कहीं….
बात आज भी होती हैं उनसे
दिन में चार daafaa पर अब उनके लहजे में वो बात नहीं…..
ग़र ऐसा चलता रहा मेरी जान
गुम हो जाऊँगी में अंधेरे में एक दिन कहीं ना कहीं….