सबकी अपनी जरूरतें है
सबकी अपनी जरूरतें है,
सबकी अपनी ख्वाहिशें।
सबकी अपनी दुनियां है,
सबकी अपनी धारणाएं।
सबकी अपनी मंजिलें है,
सबकी अपनी महफिलें।
सबकी अपनी खूबियां है,
सबकी अपनी खामियां।
सबकी अपनी समझ है,
सबकी अपनी अनुभव।
सबकी अपनी भाषाएँ है,
सबकी अपनी आशाएं।
सबकी अपनी शान है,
सबकी अपनी पहचान।
सबकी अपनी यात्राएँ है,
सबकी अपनी पीड़ाएं।
– सुमन मीना (अदिति)
लेखिका एवं साहित्यकार