नसीब नसीब की बात होती है कोई नफरत देकर भी प्यार पाता है कोई
बुगुन लियोसिचला Bugun leosichla
"बुलंद इरादों से लिखी जाती है दास्ताँ ,
तन के लोभी सब यहाँ, मन का मिला न मीत ।
केशव तेरी दरश निहारी ,मन मयूरा बन नाचे
बस जाओ मेरे मन में , स्वामी होकर हे गिरधारी
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
*इस वसंत में मौन तोड़कर, आओ मन से गीत लिखें (गीत)*
8) “चन्द्रयान भारत की शान”
वो जो मुझको रुलाए बैठा है
कान्हा तेरी मुरली है जादूभरी
krishna waghmare , कवि,लेखक,पेंटर
सुर्ख चेहरा हो निगाहें भी शबाब हो जाए ।
"आतिशे-इश्क़" ग़ज़ल
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD