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29 Oct 2024 · 1 min read

कृपा का हाथ

सरसी छंद

शीत काल के नव रातों में, फिर से आई याद
बैठ गये माता चरणों में , करन लगे फरियाद
शेष वरस डूबे रहे थे, जीवन के आयाम
मद में सब तब भूल चुके थे, माता का सम्मान
लड़की तब बस माल लगी थी, आज टेकते माथ
बदलो यह भावना तुम्हारी, पा लो किरपा हाथ

Language: Hindi
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