मोहब्बत की सजा बेमिसाल दी उसने।
“लिखें तो लिखें क्या ?”–व्यंग रचना
व्यंग्य आपको सिखलाएगा
Pt. Brajesh Kumar Nayak / पं बृजेश कुमार नायक
रास्तों को भी गुमनाम राहों का पता नहीं था, फिर भी...
*सो जा मुन्ना निंदिया रानी आई*
जब रंग हजारों फैले थे,उसके कपड़े मटमैले थे।
I buried my head in the sky, drowned in the mist.
रास्ता उन्होंने बदला था और ज़िन्दगी हमारी बदल गयी थी,
जलाना आग में ना ही मुझे मिट्टी में दफनाना
अब यह अफवाह कौन फैला रहा कि मुगलों का इतिहास इसलिए हटाया गया
नहीं जानता क्या रिश्ता है
Sometimes a thought comes
बन जाना तू इस दिल की मलिका,