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22 Aug 2024 · 1 min read

चमकत चेहरा लजाई

✍️ निर्गुण भजन ✍️

शीर्षक :
“चमकत चेहरा लजाई”

बीतल बचपन जाई जवानी
बाद बुढ़ापा आई, ए भाई हो
चमकत चेहरा लजाई, ए भाई
चमकत……………….।।१।।

करब खइब ओढ़ब पहिरब
अउरी मकान बनइब, ए भाई
कइके कमाई घोड़ा – गाड़ी
से घर तूंहूं सजइब, ए भाई
आजु के नवका चढ़ल रंगवा
सब धुमिल होइ जाई, ए भाई हो
चमकत………………..।।२।।

माई-बाप, बेटा-बेटी
बाटे जग से नाता, ए भाई
स्वारथ में दुनियां वीराना
जपि ल नाम विधाता, ए भाई
ए आतम के ठांव बनाल
अग्नि-काल लेइ खाई, ए भाई हो
चमकत चेहरा…………..।।३।।

एक – एक चीज के लिखल उमिरिया
हर दिन घटल जाला, ए भाई
जान बेजान सबही करम के
उहवां हिसाब लियाला, ए भाई
“रागी” राधेश्याम के निर्गुण
अगम राह दिखलाई, ए भाई हो
चमकत चेहरा…………।।४।।

🙏 कवि 🙏
राधेश्याम “रागी” जी
कुशीनगर उत्तर प्रदेश
सम्पर्क केंद्र : ९४५०९८४९४१

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