बुंदेली दोहा
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
पड़े बौछार रंगों की फिसलते पाँव फागुन में
जीवन का हर पल बेहतर होता है।
डाल-डाल तुम होकर आओ, पात-पात मैं आता हूँ।
अपने हाथों से काट रहे थे अपने पाँव,
बेटी
पूनम 'समर्थ' (आगाज ए दिल)
जो रास्ते हमें चलना सीखाते हैं.....
जानां कभी तो मेरे हाल भी पूछ लिया करो,
ये शिकवे भी तो, मुक़द्दर वाले हीं कर पाते हैं।
मैं कविता लिखता हूँ तुम कविता बनाती हो
मुझ पे एहसान वो भी कर रहे हैं