लोकतंत्र की आड़ में तानाशाही ?
प्रभु गुण कहे न जाएं तिहारे
मिनखपणौ
जितेन्द्र गहलोत धुम्बड़िया
लोग मेरे साथ बेइंसाफी करते हैं ।।
रामराज्य आदर्श हमारा, तीर्थ अयोध्या धाम है (गीत)
बातों में बनावट तो कही आचरण में मिलावट है
इश्क
कल्पना सोनी "काव्यकल्पना"
लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो