ऐसे नहीं की दोस्ती,कुछ कायदा उसका भी था।
वनमाली
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
रात बसर कर ली है मैंने तुम्हारे शहर में,
पुस्तक विमर्श (समीक्षा )- " साये में धूप "
पैसा ,शिक्षा और नौकरी जो देना है दो ,
मैं उसका और बस वो मेरा था
*जाऍं यात्रा में कभी, रखें न्यूनतम पास (कुंडलिया)*
*साम्ब षट्पदी---*
रामनाथ साहू 'ननकी' (छ.ग.)