गुरुवर

गुरुवर के निर्मल चरण, करते ह्रदय प्रकाश ।
श्रुतियों की वाणी सुना, करते विमल विकास||
करते विमल विकास, नयन कमलों को खोलें।
गुरुवर भानु समान, गंभीर वाणी बोलें||
कहें प्रेम कविराय, ज्ञानी जन हैं तरूवर।
मथकर मन में रमें,ध्यान धारते गुरुवर||
डा.प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम