Sahityapedia
Sign in
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
15 Dec 2022 · 1 min read

कविता

कविता जब बह निकली
काग़ज़ पर कहाँ उतरी
पहले उतरी अंतर्मन पर
ज्यूँ नाव उतरती पानी पर
शब्दों की पतवार थामे
भाव हौले हौले गोते खाते
रह रह कर मन के गागर
कभी कल्पना के सागर
विचारों की लहर लहर
उत्ताल कभी शांत डगर
नाव से बतियाती जाती
मार हिलोरे गगन चूमती
कभी खंगाल डालती मन
कभी टूट जाती अंतर्मन
फिर बनती एक लहर
मेरी कविता जाती तर

रेखांकन।रेखा

Language: Hindi
510 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.

You may also like these posts

वसंत पंचमी
वसंत पंचमी
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
भारत माता की वंदना
भारत माता की वंदना
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
मुश्किल है जीवन का सफर
मुश्किल है जीवन का सफर
Chitra Bisht
*पुस्तक समीक्षा*
*पुस्तक समीक्षा*
Ravi Prakash
हर रोज़ सोचता हूं यूं तुम्हें आवाज़ दूं,
हर रोज़ सोचता हूं यूं तुम्हें आवाज़ दूं,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
पथिक🧑‍🦯
पथिक🧑‍🦯
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस
अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस
Dr. Kishan tandon kranti
जिंदगी मिली है तो जी लेते हैं
जिंदगी मिली है तो जी लेते हैं
पूर्वार्थ
दहेज मांग
दहेज मांग
Anant Yadav
परिवार नियोजन
परिवार नियोजन
C S Santoshi
मै ही रहा मन से दग्ध
मै ही रहा मन से दग्ध
हिमांशु Kulshrestha
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
Sudhir srivastava
झूठी आशा बँधाने से क्या फायदा
झूठी आशा बँधाने से क्या फायदा
Dr Archana Gupta
जी20
जी20
लक्ष्मी सिंह
यादों की याद रखना
यादों की याद रखना
Dr. Rajeev Jain
भविष्य के सपने (लघुकथा)
भविष्य के सपने (लघुकथा)
Indu Singh
शून्य हो रही संवेदना को धरती पर फैलाओ
शून्य हो रही संवेदना को धरती पर फैलाओ
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
यादों के शहर में
यादों के शहर में
Madhu Shah
इतनी खुबसुरत हो तुम
इतनी खुबसुरत हो तुम
Diwakar Mahto
हां मैं योद्धा बनूंगी
हां मैं योद्धा बनूंगी
Madhuri mahakash
हर इन्सान परख रहा है मुझको,
हर इन्सान परख रहा है मुझको,
अश्विनी (विप्र)
मैं खुद से ही खफा हूं ..
मैं खुद से ही खफा हूं ..
ओनिका सेतिया 'अनु '
ज्ञानी
ज्ञानी
Urmil Suman(श्री)
नव निवेदन
नव निवेदन
Jeewan Singh 'जीवनसवारो'
*हाले दिल बयां करूं कैसे*
*हाले दिल बयां करूं कैसे*
Krishna Manshi (Manju Lata Mersa)
झूठो के बीच में मैं सच बोल बैठा
झूठो के बीच में मैं सच बोल बैठा
Ranjeet kumar patre
अधरों पर विचरित करे,
अधरों पर विचरित करे,
sushil sarna
कभी कभी रिश्ते मौन हो जाते हैं
कभी कभी रिश्ते मौन हो जाते हैं
Rekha khichi
3333.⚘ *पूर्णिका* ⚘
3333.⚘ *पूर्णिका* ⚘
Dr.Khedu Bharti
"😢सियासी मंडी में😢
*प्रणय प्रभात*
Loading...