हर रोज़ सोचता हूं यूं तुम्हें आवाज़ दूं,
अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस
जिंदगी मिली है तो जी लेते हैं
झूठी आशा बँधाने से क्या फायदा
शून्य हो रही संवेदना को धरती पर फैलाओ
हर इन्सान परख रहा है मुझको,
*हाले दिल बयां करूं कैसे*
Krishna Manshi (Manju Lata Mersa)
झूठो के बीच में मैं सच बोल बैठा
कभी कभी रिश्ते मौन हो जाते हैं