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17 Feb 2024 · 1 min read

Ghazal

بند آنکھوں میں تو دکھای دے
از وے خاموش میں سنای دے

تیرے احساس سے معطر ہو
زرے زرے کو رہنمای دے

پھول سا حسن دے تو لہجے کو
اور لفظوں کو خوش نمای دے

بھول جاؤں کرم کو تیرے میں
عقل کی یوں نہ بادشاہی دے

دے مجھے ربط دل مچلتا سا
اس میں تحریر کیبریائ دے

ایسی آنکھیں عطا کرے مولی
تو مجھے ہر طرف دکھای دے

बन्द आंखों में तू दिखाई दे
अज़ वे खामोश में सुनाई दे

तेरे एहसास से मोअत्तर हो
ज़र्रे ज़र्रे को रहनुमाई दे

फूल सा हुस्न दे तू लहजे को
और लफ़्ज़ों को खुश नुमाई दे

भूल जाऊं करम को तेरे मैं
अक्ल की यूं ना बादशाही दे

दे मुझे रब़्ते दिल मचलता सा
इसमें तहरीर ए क़िबरियाई दे

एसी आंखें अता करे मौला
तू मुझे हर तरफ़ दिखाई दे

शहाब उद्दीन शाह क़न्नौजी

Language: Hindi
43 Views
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