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13 Feb 2024 · 1 min read

7. तेरी याद

तेरे आने की आहट से
मैं अपने ग़म भुलाता हूँ,
कभी तू आती है छुप-छुपकर
कभी तेरी याद आती है।

ढूंढती है निगाहें मेरी
तन्हा शामों को तुझे,
कभी तेरी ज़ुल्फ़ें महकती हैं
कभी तेरी खुश्बू आती है ।

उजाले होते हैं बिन तेरे
मेरे कई बेरंग से फीके,
कभी तेरी पायल छनकती है
कभी तेरी आवाज़ आती है ।

मैं अक्सर भूल जाता हूँ
मौसम की करवट को,
वो तो हर बूंद है बारिश की
जो तेरी याद दिलाती हैं।

~राजीव दुत्ता ‘घुमंतू’

Language: Hindi
63 Views
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