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24 Apr 2021 · 1 min read

हकदार नहीं होते

ये फूल इस तरह पुर बहार नहीं होते
अगर इनके पहलू में ये ख़ार नहीं होते

ये राहे शौक है यहाँ भटकना तय है
इसमें मन्ज़िल के कोई आसार नहीं होते

अपने दर्द मे हमदर्द तुम खुद ही बनो
बेमतलब तो लोग गमख्वार नही होते

हर ख़बर पढ़ते ही सच मान ली जाये
इतने सच्चे तो अब अख़बार नहीं होते

एक दूसरे की ख़बरो ख़ैरियत लेते रहो
राब्ता कायम रहे तो रिश्ते बीमार नहीं होते

मत किया करो उसे इस तरह याद ‘अर्श ‘
बेवफ़ा लोग तवज्जो के हकदार नहीं होते

1 Like · 344 Views
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