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15 Feb 2023 · 1 min read

💐अज्ञात के प्रति-134💐

फिर मेरी जुबाँ से आफ़रीं निकला,
पयाम मिलते ही चश्म-तर हो गईं।

©®अभिषेक: पाराशरः ‘आनन्द’

Language: Hindi
25 Views
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