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15 Dec 2022 · 1 min read

🏄तुम ड़रो नहीं स्व जन्म करो🏋️

रणधीर हो तुम कायर ना बनो, अब तो अपना स्व जन्म करो
ये जीवन अमृत तुल्य तेरा, इसे सफल करो तिल भर ना डरो
रणधीर हो तुम…………
1) जो बीत गई सो बीत गई, बीती का शिकवा करो नहीं
तुम्हे टकराना चट्टानों से, टकराने से कभी डरो नहीं
ये भान रहे कुछ बड़ा करें, निज मन में स्वाभिमान भरो
रणधीर हो तुम…………
2) आँधी आ कर रास्ता रोके, तूफान तुझे भयभीत करें
चाहे काली रात अमावस हो, तुम भय चिंता से नहीं डरें
सब संकट मिटें क्लेश टलें, तुम बढ़ने का आव्हान करो
रणधीर हो तुम ………….
3) अक्सर कर दुनियादारी से, हम इतने क्यों घबराते हैं
तूफान हैं हम हैं ज्वालामुखी, क्यों पीछे कदम हटाते हैं
ना समझो निर्बल निज मन को, तुम कष्टों से संग्राम करो
लेखक:- खैमसिहं सैनी
M.A, M.Ed, B.Ed
Mob.No. 9266034599

Language: Hindi
Tag: कविता
2 Likes · 101 Views

Books from Arise DGRJ (Khaimsingh Saini)

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