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8 Feb 2024 · 1 min read

1🌹सतत – सृजन🌹

🌹सतत सृजन🌹

इस जहान में खत्म होने जैसा कुछ नहीं होता …
खुदा ने हर कदम पर कुछ नया सोचा होता है।

पतझड़ के बाद ही आती है नयी कपोलें,
संहार से पहले प्रकृति ने सृजन सोचा होता है।

माँ-बाप के बचपन, यौवन और वृद्धावस्था बीतने पर…
बच्चों ने भी यही सफर तय करना होता है।

दिन ढ़लता है गर रात के आगोश में…
सूरज निकलने से, नया सवेरा होना होता है।

नदी-नालों का जल जब सूखा देता है सूरज,
बादलों ने बरसकर, फिर जल भरना होता है।

‘मधु’ गर तूने पानी है प्रभु शरण…
सद्कर्म और प्रभु-सिमरन हर पल करना होता है।

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