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3 May 2024 · 1 min read

*🌸बाजार *🌸

1– 🌸बाजार 🌸
=======
खरीद -फरोख्त का ज़माना है
जो चाहे कोई भी खरीद ले
बस जेब भरी हो सिक्कों से
छल- बल हो,दम्भ हो सब पाने का

मान -सम्मान ,अस्मत – दया – ममता जो हो
क़ीमत भारी लगी है नहीं है कुछ अनमोल
बाजार लगा है अब इनकी नीलामी होगी
जो बिकते कुछ मजबूरी – कुछ मर्ज़ी से
नहीं रहा है ख़ौफ़ किसी का
न अपना न परायों का
कौन रोके इस खरीद- फरोख्त को
जब खुद इंसान व्यापार करे
है कोई ऐसा जो बिकने को तैयार नहीं?
दम खम कुछ बचा हो जिनमें?
माना कम ही होंगे पर कुछ तो होंगे?
दुनिया चले फिर उनके दम से
======================
स्वरचित
महिमा शुक्ला, इंदौर, (मप्र )

Language: Hindi
43 Views
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